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Vastu kya hai ? ( वास्तु क्या है ? )

       Vastu Shastra kya hai ? ( वास्तु शास

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम वास्तुशास्त्री आनंद शर्मा है आज हम जानेंगे Vastu Shastra kya hai ? ( वास्तु शास्त्र क्या है ? ) जब भी कोई व्यक्ति vastu Shastra का नाम सुनता है तो उसके मन में एक जिज्ञासा  होती है कि आखिर vastu kya hai ये कैसे काम करता है वास्तु से क्या लाभ होते है Vastu किसे कहते है और vastu कैसे use करें तो आज के इस blog में हम आपके इन सभी सवालों के जवाब देने जा रहे हैं ताकि आप आसानी से जान सकें Vastu kya hai 

वास्तु शास्त्र क्या है? (What is Vastu Shastra?)

सरल शब्दों में कहें तो ‘वास्तु’ का अर्थ होता है—वह स्थान जहाँ मनुष्य या देवता वास करते हैं। वास्तु शास्त्र केवल मकान बनाने का तरीका नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के पाँच तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) को हमारे रहने की जगह के साथ संतुलित करने का एक प्राचीन विज्ञान है। जब ये पाँचों तत्व सही दिशा और अनुपात में होते हैं, तो घर में सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) का प्रवाह बढ़ता है।

वैदिक शास्त्रों में वास्तु का इतिहास

वास्तु शास्त्र कोई आधुनिक खोज नहीं है, बल्कि यह हमारी हज़ारों साल पुरानी सनातनी परंपरा का हिस्सा है। भारत के प्राचीन ग्रंथों में इसके गहरे प्रमाण मिलते हैं:

  • ऋग्वेद और अथर्ववेद: वेदों में वास्तु को ‘स्थापत्य वेद’ के रूप में जाना गया है, जो कि अथर्ववेद का ही एक उपवेद है।

  • पुराणों का प्रमाण: मत्स्य पुराण, अग्नि पुराण और स्कन्द पुराण जैसे पवित्र ग्रंथों में भवन निर्माण, दिशाओं के महत्व और टाउन प्लानिंग (नगर नियोजन) के बारे में विस्तार से बताया गया है।

  • प्राचीन विद्वान: महर्षि विश्वकर्मा (देवताओं के वास्तुकार) और मयासुर को वास्तु शास्त्र का आदि गुरु माना जाता है।

इसके साथ ही वास्तुशास्त्र में घर को जीवंत प्राणी की दृष्टि से देखा गया है इसके पीछे वास्तु पुरुष की एक कथा है

वास्तु पुरुष की कहानी

वास्तु पुरुष की कहानी हिंदू ग्रंथों (विशेषकर मत्स्य पुराण) से जुड़ी है। यह कहानी बताती है कि भूमि पर निर्माण करने से पहले उसकी पूजा क्यों की जाती है।

उत्पत्ति और युद्ध

एक बार अंधकासुर नाम के राक्षस और भगवान शिव के बीच भयंकर युद्ध चल रहा था। युद्ध बहुत लंबा चला। युद्ध के दौरान, भगवान शिव के शरीर से पसीने की कुछ बूंदें धरती पर गिरीं। उस पसीने से एक अत्यंत विशाल और शक्तिशाली प्राणी उत्पन्न हुआ। वह दिखने में बहुत भयानक था और उसे बहुत तीव्र भूख लगी थी।

भूख और आतंक

उस प्राणी ने अपनी भूख मिटाने के लिए सामने आने वाली हर चीज को खाना शुरू कर दिया। जब उसका पेट नहीं भरा, तो उसने तीनों लोकों (स्वर्ग, धरती और पाताल) को निगलने के लिए तपस्या शुरू कर दी। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे मनचाहा वरदान मांगने को कहा। उस प्राणी ने वरदान मांगा कि वह तीनों लोकों को खा सके। शिवजी ने ‘तथास्तु’ कह दिया।

देवताओं का हस्तक्षेप

वरदान पाते ही वह प्राणी पूरी पृथ्वी को घेरने लगा। इससे सभी देवता, असुर और दिक्पाल (दिशाओं के रक्षक) घबरा गए। उन्हें लगा कि यह प्राणी सृष्टि का विनाश कर देगा। इस संकट से बचने के लिए ब्रह्मा जी के नेतृत्ववास्तु में सभी देवताओं ने मिलकर उस प्राणी को घेर लिया और उसे जमीन पर औंधे मुंह (पेट के बल) गिरा दिया।

उसे दोबारा उठने से रोकने के लिए सभी देवता उसके शरीर के अलग-अलग अंगों पर बैठ गए।

उसके सिर पर ब्रह्मा जी बैठ गए।

पैरों, हाथों और अन्य अंगों पर अलग-अलग देवी-देवता बैठ गए।

देवताओं के भारी वजन के कारण वह प्राणी हिल भी नहीं पा रहा था।

वास्तु पुरुष का वरदान

जब वह प्राणी देवताओं के दबाव में दब गया, तो उसने ब्रह्मा जी से प्रार्थना की, “हे प्रभु! मेरा क्या कसूर है? मुझे शिवजी के पसीने से बनाया गया और भूख लगना मेरा स्वभाव है। आपने मुझे इस तरह क्यों बंदी बना लिया?”

ब्रह्मा जी को उस पर दया आई। उन्होंने कहा, “आज से तुम ‘वास्तु पुरुष’ कहलाओगे। तुम इसी तरह धरती पर निवास करोगे। जो भी मनुष्य धरती पर घर, मंदिर, तालाब या नगर का निर्माण करेगा, उसे निर्माण से पहले तुम्हारी पूजा करनी होगी। यदि कोई तुम्हारी दिशाओं का ध्यान रखकर (वास्तु शास्त्र के अनुसार) निर्माण करेगा, तो उसे सुख-समृद्धि मिलेगी। जो तुम्हारी उपेक्षा करेगा, उसे कष्ट और दरिद्रता का सामना करना पड़ेगा।”

वास्तु पुरुष की स्थिति

तभी से वास्तु पुरुष धरती पर औंधे मुंह लेटे हुए हैं। उनका सिर उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) में है और पैर दक्षिण-पश्चिम दिशा (नैऋत्य कोण) में हैं। उनकी पीठ ऊपर की तरफ है और पेट नीचे की तरफ। घर बनाते समय आज भी इसी कहानी के आधार पर दिशाओं का निर्धारण किया जाता है ताकि संबंधित देवता प्रसन्न रहें और घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे।

वास्तु के पंचमहाभूत और दिशाओं का गणित

वास्तु शास्त्र पूरी तरह से दिशाओं और ऊर्जा पर काम करता है। हमारे ब्रह्मांड की आठों दिशाएं किसी न किसी तत्व और देवता से जुड़ी हैं:

1. उत्तर दिशा North  Direction Vastu  –  इसे कुबेर देव की दिशा भी कहा जाता है वास्तु में इस दिशा को बहुत शुभ माना जाता है ये दिशा मुख्य रूप से 360° पर होती है  इस दिशा में खुली जगह बाग बाग बगीचे ओर पानी के स्त्रोत होना vastu में बहुत शुभ माना जाता है ।

2. पूर्व दिशा East Direction Vastu – ये भगवान सूर्य देव की दिशा होती है  vastu में ये दिशा मुख्य रूप से 90° पर होती है इस दिशा को भी साफ सफाई के साथ रखना चाहिए यहां से सूर्य की रोशनी घर में आके सभी नकारात्मक ऊर्जाओं का नाश करती है पूर्व दिशा में बरामदा ,  मेहमान कमरा  गार्डन लगाना शुभ माना जाता है ।।

3. दक्षिण दिशा South Direction Vastu – इसे यम की दिशा कहा जाता है बहुत से लोग  South Facing Ghar बनाने से डरते है लेकिन ऐसा नहीं है ये दिशा 180° पर होती है और इस दिशा का घर अगर पूर्ण वास्तुशास्त्र अनुसार बने तो बहुत अच्छे परिणाम देते हैं ।।

4. पश्चिम दिशा West Direction Vastu – ये दिशा भगवान शनि महाराज की होती है जो 270° पर होती है इस दिशा के घर भी भी अगर वास्तु अनुरूप बने हो तो विदेश यात्रा तक करा सकते हैं ।।

5. ईशान कोण NE Direction Vastu (उत्तर-पूर्व): यह जल तत्व की दिशा है, जिसे भगवान शिव और कुबेर का स्थान माना जाता है। यहाँ पूजा घर या ध्यान केंद्र होना सबसे अच्छा है।

6. आग्नेय कोण SE  Direction Vastu (दक्षिण-पूर्व): यह अग्नि तत्व की दिशा है। इसलिए यहाँ रसोई घर (Kitchen) का होना अनिवार्य माना गया है।

7. नैऋत्य कोण SW Direction Vastu (दक्षिण-पश्चिम): यह पृथ्वी तत्व की दिशा है, जो स्थिरता देती है। यहाँ घर के मुखिया का बेडरूम होना चाहिए।

8. वायव्य कोण NW Direction Vastu (उत्तर-पश्चिम): यह वायु तत्व की दिशा है, जो बदलाव और गतिशीलता को दर्शाती है। यह गेस्ट रूम या स्टोर रूम के लिए सही है।

घर के लिए 5 बुनियादी वास्तु टिप्स (Quick Vastu Tips) ताकि आप समझ सकें Vastu Shastra kya hai 

यदि आप अपने घर में खुशहाली और तरक्की चाहते हैं, तो इन बुनियादी बातों का ध्यान रखें:

  • मुख्य द्वार: घर का मेन गेट हमेशा साफ-सुथरा, चमकदार और उत्तर या पूर्व दिशा में होना चाहिए।
  • सोने की दिशा: सोते समय आपका सिर हमेशा दक्षिण (South) या पूर्व (East) दिशा में होना चाहिए। उत्तर की तरफ सिर करके कभी न सोएं।
  • पानी का स्थान: घर में पानी का सोर्स (जैसे बोरिंग, वाटर टैंक) हमेशा उत्तर या पूर्व दिशा में रखें।
  • कबाड़ से बचें: घर की छत पर या सीढ़ियों के नीचे कभी भी फालतू सामान या कबाड़ न इकट्ठा होने दें, इससे राहु का नकारात्मक प्रभाव बढ़ता है।
  • रोशनी और हवा: घर में पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी और ताजी हवा आने की व्यवस्था होनी चाहिए, क्योंकि यह नकारात्मकता को दूर करती है।

निष्कर्ष (Conclusion)

वास्तु शास्त्र कोई अंधविश्वास नहीं, बल्कि एक पूर्ण वैज्ञानिक और व्यावहारिक विधा है। जिस तरह हम बीमार होने पर शरीर का इलाज कराते हैं, ठीक उसी तरह घर की ऊर्जा को ठीक करने के लिए वास्तु नियमों का पालन किया जाता है। यदि आप भी अपने जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति चाहते हैं, तो अपने घर को वास्तु के अनुसार व्यवस्थित जरूर करें।

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